बाबा भीमराव अम्बेडकर के संघर्ष की कहानी, भारत को मजबूत संविधान दिया

बाबा भीमराव अम्बेडकर के संघर्ष की कहानी, भारत को मजबूत संविधान दिया

वो कहते हैं ना कि अगर इंसान में कुछ करने का जज्बा हो तो कोई भी शक्ति उसे रोक नहीं सकती। भारत देश को एक मजबूत और दुनिया का सबसे बडा संविधान देने वाले बाबा भीमराव अम्बेडकर की संघर्ष भरी कहानी जो आपके रोंगटे खडे कर देगी और जीवन में कठिनाईयों से लडने का साहस प्रदान करेगी। बाबा भीम राव अंबेडकर केवल दलितों के ही नेता नहीं थे, उन्होंने हर वर्ग को अपने साथ लिया और समाज की छोटी सोच को बदलने का प्रण लिया था। उन्होंने इतनी पढाई की थी कि दुनिया के गिनती के लोगों में उनका नाम आता है ना कि प्रसेंटेज में। हर एक अवार्ड में जहां भीमराव अम्बेडकर लिखा जाता था वहीं उसके साथ भारत देश का नाम भी सुनहरे अक्षरों में लिखा जाता था जो उस समय यानि आज से करीब 130 साल पहले एक गर्व की बात थी। अंग्रेजों को सोचने पर मजबूर कर दिया था कि इतना विद्वान व्यक्ति भारत में कोई ओर नहीं है। स्वंय गांधी जी भी मानते थे कि इनके जैसा विद्ववान व्यक्ति कोई दूसरा नहीं है। जब भारत देश का अलग संविधान बनाने की बात आई तो महात्मा गांधी ने साफ कह दिया था कि मुझे नहीं लगता कि भीमराव अम्बेडकर के अलावा देश का संविधान बनाने की हिम्मत करेगा।

14 अप्रैल 1891 को जन्म
बाबा भीम राव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के महू जिले में हुआ था। वे माहर (दलित) जाति से संबध रखते थे। उनके बचपन का नाम भिवा था। उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल था और माता भीमाबाइ सकपाल था जोकि एक गृहिणी थीं। बचपन बडी कठिनाईयों से गुजरा। छुआछूत के कारण उनके साथ कई ऐसी दिल दहला देने वाली घंटनाएं हुई जिन्हें सुना नहीं जाएगा।

स्कूल में दाखिला भी आसान नहीं था
भीम राव अम्बेडकर के पिता रामजी सकपाल ने 7 नवंबर सन 1900 को पूणे के नजदीक सातारा के गर्वमेंट हाई स्कूल में अपने बेटे भिवा का दाखिला करवाना चाहा मगर बात नहीं बनी। चूंकि लडका पढना चाहता था और पिता के पास ओर कोई चारा नहीं था। वे गायकवाड के राजा के पास गए। उन्होंने उनके बारे में सोचा और सिफारिश लगवाकर स्कूल में दाखिला दिलवाया।

अध्यापक से लेकर छात्रों ने दुत्कारा
जब भीम राव स्कूल जाने लगे तो अध्यापक ने उनको अंदर आने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर पढना है तो बाहर बैठकर पढो। दलित होने के कारण उनके साथ काफी अत्याचार किया गया। भीम राव अम्बेडकर कक्षा के बाहर बैठकर पढने लगे। एक दिन मास्टर ने कुछ प्रश्न का जवाब भीम राव से पूछा तो भीम राव ने चाॅक उठाकर प्रश्न का हल कर दिया लेकिन कक्षा में बैठे छात्रों को यह गवारा नहीं और उन्होंने अपने-अपने बैग वहां से उठा लिया ताकि उसकी परछाई उनके खाने पर ना गिर जाए।

आंबडवेकर से बने आम्बेडकर
भीम राव के पिता रामजी सकपाल ने उनका नाम उपनाम सकपाल की बजाय आंबडवेकर लिखवाया था जोकि उनके आंडवे गांव से संबधित था क्योंकि कोकण प्रांत के लोग अपना उपनामम गांव के नाम से रखते थे, अतः अम्बेडकर के आंबडवे गांव से आंबडवेकर उपनाम स्कूल में दर्ज करवाया। बाद में एक ब्राहमण शिक्षक कृष्ण महादेव आंबेडकर जो उनसे विशेष स्नेह रखते थे, ने उनके नाम से आंबडवेकर हटाकर अपना सरल आंडकेकर उपनाम जोड दिया। तब से आज तक वे आंबेडकर नाम से जाने जाते हैं।

रिक्शा वाले ने अपमानित किया
चूंकि उस समय नीच जाति के लोगों से काफी नफरत की जाती थी। एक दिन भीम राव अंबेडकर रिक्शा पर जा रहे थे। रिक्शा चालक को पता चला कि यह लडका दलित है तो उसने उसे नीचे उतारा और कहा कि अब तुम्हे रिक्शा चलाना है और मैं ही तुमसे पैसे लूगां। इस घटना ने भीमराव अंबेडकर जी को अंदर से हिला दिया।

कुएं से पानी पीने पर पडी मार
भीम राव बच्चे थे, खेलते हुए उन्होंने एक बार गांव के कुएं से पानी पी लिया। वहां उनके पिता ने उन्हें बहुत मारा लेकिन कहते हैं ना कि हीरे को जितना घिसो उतना चमकता है तो भीम राव के साथ भी यही हुआ। उनके मन में यह ज्वाला भडक रही थी कि हमारे साथ ऐसा क्यों होता है।

बाबा भीमराव अम्बेडकर

मात्र 15 वर्ष की आयु में विवाह
रामजी सकपाल अपने परिवार सहित बंबई चले गए। मात्र 15 वर्ष आयु में 9 साल की लडकी रमाबाई से अप्रैल 1906 को शादी कर दी। उस समय बाल विवाह प्रथा का प्रचलन था। शादी करने की कोई उम्र नहीं थी।

9 भाषाओं का ज्ञान
भीम राव अम्बेडकर को करीब 9 भाषाओं का ज्ञान था। उन्होंने अंग्रेजी, हिंदी, मराठी, तेलगू सहित अनेक भाषाएं आती थी। उन्होंने सभी धर्मों को मात्र 21 वर्ष की उम्र में ही पढ डाला। अपना कीमती समय पढने में बिताते थे।

32 डिग्रियां
अलग-अलग विषयों में भीम राव अम्बेडकर के पास कुल 32 डिग्रियां थीं जोकि उस समय केवल उन्ही के पास ही थीं। उनके नाम के आगे डा. लगाया गया।

BA (Bombay)
MA (Columbia University)
MA (Economics)
MA (History)
MA (History)
MA (Sociology)

London School of Economics
M.Sc
Law
Doctorate

जिस राजा ने उनकी मदद की उनके पास आए
गायकवाड के जिस राजा ने उनकी मदद की, वे उन्हीं के पास पढकर सबसे पहले आए। उन्होंने डा. भीमराव अम्बेडकर को मिल्ट्री में सचिव के पद पर नौकरी दिलवाई। उस समय वह बडा पद माना जाता था।

छूआछूत ने साथ नहीं छोडा
डा. भीमराव अम्बेडकर का छुआछूत ने साथ नहीं छोडा। जब वे अपने पद पर अपना काम करते थे तो चपडासी उनके पास फाईल दूर से ही फैंक देते थे। उन्हें कहा जाता था कि बाहर जाकर खाना खाकर आएं। वे बाहर खाना खाकर आते थे। वे इससे बहुत दुखी हुए।

तकलीफों ने पीछा नहीं छोडा
उनकी धर्मपत्नी रमाबाई को 5 संताने हुई जिनमें से 4 की मृत्यु हो गई। उस समय ईलाज की सुविधा नहीं थी। कुछ समय बाद उनकी पत्नी का भी देंहात हो गया। इस त्रासदी के बाद कोई भी आदमी टूट सकता था लेकिन वे टूटे नहीं। उनका ब्राहम्ण जाति से संबध रखने वाली सविता ने साथ दिया और शादी कर ली।

बाबा भीमराव अम्बेडकर

देश के लिए लडते रहे
उनके एक तरह का जज्बा था कि देश को आगे लेकर जाउगा। छुआछूत को जड से खत्म करूगां। वे हमेशा देश के लिए लडते रहे। उस समय जब दलितों को कुएं से पानी भरने की ईजाजत नहीं थी तो भीम राव अम्बेडकर को काफी दुख हुआ था। 1927 को सत्याग्रह आंदोलन में उन्होनें प्रण लिया था कि सभी दलितों को कुएं से पानी पीने का अधिकार दिलाकर रहूगां।

महिलाओं को दिया पूरी साडी पहनने का अधिकार
उस समय दलित महिलाएं घुटने से थोडी नीचे साडी पहनती थी। उन्हें यही आदेश दिया गया था लेकिन भीम राव अम्बेडकर जोकि विदवान थे उन्होंने सभी महिलाओं को नीचे तक साडी पहनने का अधिकार दिया।

जब भीम राव अम्बेडकर के खिलाफ महात्मा गांधी अनशन पर बैठे
उस समय भीम राव अम्बेडकर सांप्रदायिक मतदाता के पक्ष में महात्मा गांधी से मिलने आए थे। उन्होंने कहा कि दलितों को अलग करना है क्योंकि वे छुआछूत की पीडा सह रहे हैं और मैं इनको इनके अधिकार दिलवाकर रहूगां। महात्मा गांधी ने भीम राव अम्बेडकर को कहा कि भारत देश को आजाद करना है। हम जातियों में नहीं बंट सकते। पहले ही अंग्रेजों ने हमारी एकजुटता की कमी का फायदा उठाया है। भीम राव अम्बेडकर ने कहा कि मैं दलितों के साथ अन्याय नहीं होने दूगां। इतना कहकर भीम राव अम्बेडकर वहां से चले गए। पीछे से महात्मा गांधी ने अनशन शुरू कर दिया। अब भीम राव अम्बेडकर दुविधा में पड गए कि क्या किया जाए। अम्बेडकर वापिस गांधी के पास आए और उन्होंने गांधी का अनशन छुडवाया और उनकी बात मानी। उस समय दलितों का काफी शोषण होता था। इतना शोषण होता था कि दलित घूट-घूट कर मरते थे।

आरबीआई की स्थापना
आज जो आरबीआई भारत की अर्थव्यवस्था का संचालन करती है, उसकी स्थापना बाबा भीम राव अम्बेडकर की लिखी पुस्तक The Evolution of Provincial Finance in British India & The Problem of the Rupee से हुई है। उन्होंने इस किताब को लिखा था।

बाबा भीमराव अम्बेडकर

भीम राव को लेकर जवाहर लाल नेहरू और महात्मा गांधी की बहस
जब 1947 को अंग्रेजों की हुकूमत से भारत आजाद हुआ था तब जवाहर लाल नेहरू अपनी केबिनेट मंत्रियों की लिस्ट लेकर महात्मा गांधी के पास आए। उन्होंने अपनी केबिनेट महात्मा गांधी को दिखाई। महात्मा गांधी ने कहा कि इसमें भीम राव अम्बेडकर का नाम नहीं है। वहां दोनों की बहस हुई। कानून मंत्री के तौर पर बाबा भीम राव अम्बेडकर को मसौदा समिति का चेयरमैन बनाया गया। चूंकि भीम राव इतने बुद्धिमान थे, कई देशों के संविधान को पढ रखा था, उनके सामने नेहरू बोले ही नहीं।

हिंदू कोड बिल का विरोध
बाबा अम्बेडकर ने 1951 में संसद में हिंदू कोड बिल रखा। इस बिल में महिलाओं को सम्मान अधिकार देने सहित अनेक सुविधाएं थीं। उन्होंने बिल में महिलाओं के लिए जो करना चाहा वो किया। हिंदू ताकतों की वजह से यह बिल पेश नहीं हो सका। उन्होंने हिंदू ताकतों के आगे घूटने नहीं टेके। उन्होंने 1951 में मंत्रीपद से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे में लिखा

आज हिंदू कोड बिल की हत्या कर दी गई ऐसे में मेरे मंत्री बने रहने का समझ में नही आता। बिल में शादी तलाक संबधित विधेयक पर 2 दिन चर्चा चली। फिर प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने पूरे हिंदू कोड बिल को वापिस लेने की घोषणा की। मैं हैरान रह गया, मैं यह मानने को तैयार नहीं हूं कि तलाक और विवाह और संबधति बिल समय की कमी के चलते पास नहीं करवाया जा सका। मुझें पीएम की नियत पर शक नहीं है लेकिन हिंदू कोड बिल पास करवाने के लिए जिस संकल्प और ईमानदारी की जरूरत थी, वो नहीं दिखी।


अनुच्छेद 370 का विरोध
आम्बेडकर ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 का विरोध किया था। इस धारा ने जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा दिया, और जिसे उनकी इच्छाओं के खिलाफ संविधान में शामिल किया गया था। बलराज माधोक ने कहा था कि, आम्बेडकर ने कश्मीरी नेता शेख अब्दुल्ला को स्पष्ट रूप से बताया था आप चाहते हैं कि भारत को आपकी सीमाओं की रक्षा करनी चाहिए। उसे आपके क्षेत्र में सड़कों का निर्माण करना चाहिए। उसे आपको अनाज की आपूर्ति करनी चाहिए और कश्मीर को भारत के समान दर्जा देना चाहिए। लेकिन भारत सरकार के पास केवल सीमित शक्तियां होनी चाहिए और भारतीय लोगों को कश्मीर में कोई अधिकार नहीं होना चाहिए। इस पर बाबा भीम राव अम्बेडकर ने कहा कि इस प्रस्ताव को सहमति देने के लिए मैं भारत के कानून मंत्री के रूप में भारत के हितों के खिलाफ ऐसा कभी नहीं करूगां।


उनके द्वारा लिखी गई किताबें

  1. The Evolution of Provincial Finance in British India
  2. Castes in India: Their Mechanism, Genesis and Development
  3. Mook Nayak (weekly)
  4. The Problem of the Rupee: its origin and its solution
  5. Bahishkrut Bharat (India Ostracized)
  6. Janta (weekly)
  7. The Annihilation of Caste
  8. Federation Versus Freedom
  9. Thoughts on Pakistan
  10. Ranade, Gandhi and Jinnah
  11. Gandhi and Emancipation of Untouchables
  12. What Congress and Gandhi have done to the Untouchables
  13. Pakistan Or Partition Of India
  14. State and Minorities
  15. Who were the Shudras
  16. Maharashtra as a Linguistic Province
  17. The Untouchables
  18. Buddha Or Karl Marx
  19. The Buddha and his Dhamma
  20. Riddles in Hinduism

The Problem of the Rupee: its origin and its solution

फिल्में

बाबा भीम राव अम्बेडकर पर कई निर्शेदकों ने फिल्म बनाई है। उनकी कई फिल्मों को अवार्ड भी मिले हैं।

भीम गर्जना:
विजय पवार द्वारा निर्देशित 1990 की मराठी फिल्म, जिसमें आंबेडकर की भूमिका कृष्णानंद ने निभाई थी।

बालक आम्बेडकर:
बसवराज केत्थुर द्वारा निर्देशित 1991 की कन्नड फिल्म, जिसमें आंबेडकर की भूमिका चिरंजिवी विनय ने निभाई थी।

युगपुरुष डा. बाबासाहेब आंबेडकर:
शशिकांत नालवडे द्वारा निर्देशित 1993 की मराठी फिल्मए जिसमें आंबेडकर की भूमिका नारायण दुलाके ने निभाई थी।

डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर:
जब्बार पटेल द्वारा निर्देशित 2000 की अंग्रेजी फिल्म, जिसमें आंबेडकर की भूमिका मामूट्टी ने निभाई थी।

डॉ. बीआर आम्बेडकर:
शरण कुमार कब्बूर द्वारा निर्देशित 2005 की कन्नड फिल्म, जिसमें आंबेडकर की भूमिका विष्णुकांत बी ने निभाई थी।

तीसरी आजादी:
जब्बार पटेल द्वारा निर्देशित 2006 की एक हिंदी फिल्म।

रायजिंग लाइट:
2006 में आंबेडकर पर बनी डॉक्युमेंट्री फिल्म

रमाबाई भीमराव आम्बेडकर:
रमाबाई आंबेडकर के जीवन पर आधारित एवं प्रकाश जाधव द्वारा निर्देशित 2010 की मराठी फिल्म, जिसमें भीमराव आंबेडकर की भूमिका गणेश जेठे ने निभाई थी।

शूद्रा द राइझिंग:
आम्बेडकर को समर्पित एवं प्रकाश जाधव द्वारा निर्देशित 2010 की हिंदी फिल्मए जिसमें जय जय भीम गीत भी है।

अ जर्नी ऑफ सम्यक बुद्ध:
हिंदी फिल्म 2013 में आई थी जो आम्बेडकर के भगवान बुद्ध और उनका धम्म ग्रन्थ पर आधारित है।

रमाबाई:
एम रंगनाथ द्वारा निर्देशित 2016 की कन्नड फिल्म, जिसमें भीमराव आंबेडकर की भूमिका सिद्दराम कर्नीक ने निभाई थी।

बोले इंडिया जय भीम:
सुबोध नागदेवे द्वारा निर्देशित 2016 की मराठी फिल्म, जिसमें आंबेडकर की भूमिका श्याम भिमसारीयां ने निभाई थी।

शरणं गच्छामि:
प्रेम राज द्वारा निर्देशित 2017 की तेलुगु फिल्म, जो आंबेडकर के विचारों पर आधारित है। फिल्म में आम्बेडकर शरणं गच्छामि नामक गीत भी हैं, जिसमें आंबेडकर की भी भूमिका दिखाई गई है।

बाल भिमराव:
प्रकाश नारायण द्वारा निर्देशित 2018 की मराठी फिल्म, जिसमें आंबेडकर की भूमिका मनीष कांबले ने निभाई थी।

रमाई:
बाल बरगले द्वारा निर्देशित एक आगामी मराठी फिल्म।
पेरियार: पेरियार के जीवन पर आधारित एवं ग्नाना राजशेकरण द्वारा निर्देशित 2007 की तमिल फिल्म, जिसमें डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की भूमिका मोहन रान ने निभाई थी।

बाबा भीमराव अम्बेडकर

हिंदू विरोधी कभी नहीं रहे
बाबा भीम राव अम्बेडकर कभी हिंदू विरोधी नहीं रहे। वे हिंदू कुरितियों से परेशान थे। वे एक सभ्य समाज चाहते थे जिसमें सभी को समान अधिकार मिले।

हिंदू धर्म छोडने की घोषणा
वे हिंदू धर्म छोडना चाहते थे और ऐसे धर्म की तलाश में थे जिसमें शांति हो। जब इस बात का पता हैदराबाद के एक नजिम को पता चला तो उन्होंने भीम राव अम्बेडकर को प्रलोभन दिया कि वे इस्लाम धर्म अपना लें इसके बदलें में उन्हें व उनके समर्थकों को लाखों रूपए और अलग से अनेक सुविधाएं दी जाएगीं। लेकिन बाबा भीम राव अम्बेडकर ने इस प्रस्ताव को नहीं लिया।

1956 को बोद्ध धर्म अपनाया
अपने लाखों समर्थकों के साथ उन्होंने 14 अक्तूबर 1956 को नागपुर में बोद्ध धर्म अपनाया। उन्होंने कहा कि मैं हिंदू विरोधी नहीं हूं और हिंदू सहित भारत की प्रतिष्ठा पर आंच नहीं आने दूगां।

मृत्यु
वे डायबिटिज की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। दिल्ली में 6 दिसम्बर 1956 को अंतिम सांस ली। उनके समर्थकों के आंसू थम नहीं रहे थे। वे उनके लिए एक देवता ही थे।

अनेक खुबियों के धनी थे
बाबा भीम राव अम्बेडकर भाषा, भाषण, चर्चा, आचरण, किताबें लिखना, संविधान लिखना, सहनशीलता के धनी थे। उनके बराबर उस समय कोई नहीं था। एक दलित के बच्चे ने शिक्षा के बल पर सभी की चूलें हिला दी थी।


बाबा भीम राव अम्बेडकर के बारे में ऐसी अफवाहें फैलाई जाती हैं कि वे हिंदू विरोध थे और इसलिए उन्होंने बोद्ध धर्म अपनाया लेकिन ऐसा नही है। उन्होंने कभी भी देशहित के खिलाफ कदम नहीं उठाया। अगर आप उनकी बायोग्राफी पढेंगे तो यकीन हो जाएगा। बाबा भीम राव अम्बेडकर ने सभी को सम्मान अधिकार दिलवाया।

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उपरोक्त जानकारी किताबों, सोशल मीडिया, सोशल नाॅलेज चेनल्स एंव वीकीपीडिया से ली गई है। हमारा उददेश्य आपको गलत जानकारी देना नहीं है फिर भी आप यहां दर्शाए गए तथ्यों को अपने हिसाब से पुख्ता कर लें।

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