हनुमानाष्टक है प्रभावशाली, पाठ करने से भक्तों के होते हैं कष्ट दूर

हनुमानाष्टक है प्रभावशाली,

भगवान हनुमान जी को प्रसन्न करना बहुत आसान है। बस कुछ नियम बनाने होते हैं जिनमें ब्रहमचर्य का पालन सबसे पहले करना होता है। हनुमान जी वैसे तो अपने भक्तों को कभी भी निराश नहीं करते हैं हर पल उनका साथ देते हैं लेकिन कई बार भक्त कुछ ऐसी गडबडी कर बैठते हैं जिनसें हनुमान जी नाराज हो जाते हैं और भक्त की अर्जी को लटका देते हैं।

हनुमानाष्टक है प्रभावी

जब आप भगवान हनुमान के मंदिर में जाते हैं तो वे आपके जाते ही समझ जाते हैं कि आपकी समस्या क्या है और इसको कैसे सुलटाया जा सकता है। वे बस यह देखते हैं कि क्या यह भक्त मेरे लिए आया है या अपनी समस्या को खत्म करवाने आया है। बस तभी से उसकी परीक्षा लेना शुरू कर देते हैं। हनुमान जी चाहें तो आप जैसे ही मंदिर में एंट्री मारते हैं तभी आपकी समस्या को दूर कर दें लेकिन वे ऐसा नहीं करते क्योंकि भगवान भाव का भूखा होता है। यह तो स्वाभाविक सी बात है कि इंसान का काम पूरा हो जाता है तो वह भगवान को भूल जाता है। इसलिए भगवान पहले भक्त की आस्था बनवाते हैं और फिर उनकी समस्या का समाधान करते हुए उनकी इच्छा पूरी करते हैं।

आईए जानते हैं हनुमान अष्टक क्या है और इसका पाठ कैसे किया जाता हैः-
किसी भी शुभ मंगलवार को प्रातः जल्दी उठकर हनुमान मंदिर में जाएं। अपने पास लाल छोटा सा कपडा (रूमाल) अवश्य रखें। वैसे तो लाल रंग के वस्त्र पहनने होते हैं लेकिन आजकल की भागदौड जिंदगी में इतना समय किसी के पास नहीं है जो दोबारा कपडे बदले इसलिए लाल रंग का कपडा अपने पास रखें। भगवान हनुमान को नारियल, चमेली का तेल, सुपारी, लडडू, 1 मीटर लाल रंग का कपडा चढाएं। अगर आपकी तरफ से संभव न हो तो पंडित से कहकर हनुमान जी के चरणों में चढवां दें और पंडित जी को 11 रूपए की दक्षिणा दें दें। इसके बाद आप लाल आसन पर बैठकर हनुमान जी के हनुमान अष्टक का 11 बार पाठ करें। अगर 11 संभव न हो तो 5 पाठ करें। 5 संभव न हों तो 3 पाठ अवश्य करें। यह पाठ आप हर रोज करें। भगवान हनुमान के लिए 15 मिनट हर रोज निकालें। आप हर मंगलवार को यह सभी चीजें हनुमान जी के चरणों में चढाएं तो बहुत ही अच्छा फल मिल सकता है। हां, पाठ आप हर रोज करें। भगवान हनुमान आपको आजमाने के लिए आपको मंदिर में भी आने से रूकवाएगें लेकिन आप मंदिर अवश्य जाएं और उनकी आराधना करें।

पहले जानिए क्या है हनुमानाष्टक
हनुमान अष्टक में हनुमान जी की लीलाओं का वर्णन है। बचपन से लेकर राम के कार्यों तक इनकी शोर्य गाथा है। अगर आप हिंदी में इस पाठ को समझेंगे तो बहुत अच्छा होगा क्योंकि हम हवाई पाठ करके चले जाते हैं और पाठ का मतलब नहीं पता होता। इसका मतलब जानना जरूरी है। हनुमान जी को बचपन में ऋषियों से श्राप मिलें हुए हैं जिनसे वे अपने बल को भूल जाते हैं। हनुमान अष्टक का अगर पाठ किया जाए तो हनुमान जी जल्दी ही भक्त को उसकी इच्छा पूरी करते हैं।

पहले हिंदी में पाठ को समझिए

बाल समय रवि भक्षि लियो तब
तीनहुं लोक भयो अंधियारों
ताहि सो त्रास भयो जग को
यह संकट काहु सों जात न टारो
देवन आनि करी विनती तब
छाड़ि दियो रवि कष्ट निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि
संकटमोचन नाम तिहारो
अर्थातः हे परमवीर हनुमान जी! आपने बाल्यकाल में सूर्य को खा लिया था और तीनों लोक में अंधेरा हो गया था। पूरे जग में विपदा का समय था जिसे कोई टाल नहीं पा रहा था। सभी देवताओं ने आपसे प्रार्थना कि कि सूर्य को छोड दें और हम सभी के कष्टों को दूर करें। कौन नहीं जानता ऐसे कपि को जिनका नाम हीं संकट मोचन अर्थात संकट को हरने वाला है। आपने देवताओं के बडे और कठिन कार्यों को पूरा किया है, फिर मुझ दीन-हीन का ऐसा कौन सा संकट हो सकता है, जिसे आप दूर नहीं कर सकते।

बालि की त्रास कपीस बसै गिरि
जात महाप्रभु पंथ निहारो
चैंकि महामुनि शाप दियो तब
चाहिए कौन बिचार बिचारो
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु
सो तुम दास के शोक निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि
संकटमोचन नाम तिहारो

अर्थात: बाली से डरकर सुग्रीव और उसकी सेना पर्वत पर आकर रहने लगती हैं। इन्होंने भगवान राम को इस तरफ बुलाया और स्वंय ब्राहम्ण का वेश रख भगवान की भक्ति की इस प्रकार ये भक्तों के संकट दूर करते हैं।

अंगद के संग लेन गए सिय
खोज कपीस यह बैन उचारो
जीवत न बचिहौ हम सो जु
बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो
हरि थके तट सिन्धु सबै तब
लाए सिया-सुधि प्राण उबारो
को नहीं जानत है जग में कपि
यसंकटमोचन नाम तिहारोद्ध
संकटमोचन नाम तिहारो

अर्थात: अंगद के साथ जाकर आपने माता सीता का पता किया और उन्हें खोजा एंव इस मुश्किल का हल किया। उनसे कहा गया था कि अगर आप बिना सीता माता की खबर लिए समुद्र तट पर आओगे तो कोई नहीं बचेगा। उसी तट पर सब थके हारे बैठे थे जब आप सीता माता की खबर लाए तब सबकी जान में जान आई।

रावण त्रास दई सिय को सब
राक्षसि सो कही सोक निवारो
ताहि समय हनुमान महाप्रभु
जाए महा रजनीचर मारो
चाहत सीय असोक सों आगिसु
दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि
संकटमोचन नाम तिहारो

अर्थातः रावण ने सीता माता को बहुत डराया और अपने दुखों को खत्म करने के लिए राक्षसों की शरण में आने को कहा। तब मध्य रात्रि समय हनुमान जी वहां पंहुचे और उन्होंने सभी राक्षसों को मार कर अशोक वाटिका में माता सीता को खोज निकाला और उन्हें भगवान राम की अंगूठी देकर माता सीता के कष्टों का निवारण किया।

बान लग्यो उर लछिमन के तब
प्राण तजे सुत रावण मारो
लै गृह बैद्य सुषेन समेत
तबै गिरि द्रोण सुबीर उपारो
आनि सजीवन हाथ दई तब
लछिमन के तुम प्रान उबारो
को नहीं जानत है जग में कपि
संकटमोचन नाम तिहारो
अर्थातः रावण के पुत्र इंन्द्रजीत के शक्ति के प्रहार से लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं उनके प्राणों की रक्षा के लिए हनुमान जी वैदय सुषेन को उनके घर के साथ उठाकर ले आते हैं। और उनके कहे अनुसार बूटियों के पहाड को उठाकर ले आते हैं और लक्ष्मण को संजीवनी देकर उनके प्राणों की रक्षा करते हैं।

रावन युद्ध अजान कियो तब
नाग कि फांस सबै सिर डारो
श्री रघुनाथ समेत सबै दल
मोह भयो यह संकट भारो
आनि खगेस तबै हनुमान जु
बंधन काटि सुत्रास निवारो
को नहीं जानत है जग में कपि
संकटमोचन नाम तिहारो

अर्थातः रावण ने जब राम एंव लक्ष्मण पर नाग पाश चलाया तब दोनों ही मूर्छित हो जाते हैं और सभी पर संकट छा जाता है। नाग पाश के बंधन से केवल गरूड राज ही मुक्त करवा सकते हैं। तब हनुमान उन्हें लाते हैं और सभी के कष्टाों का निवारण करते हैं।

बंधु समेत जबै अहिरावन
लै रघुनाथ पताल सिधारो
देबिन्ही पूजि भली विधि सों बलि
देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो
जाये सहाए भयो तब ही
अहिरावन सैन्य समेत संहारो
को नहीं जानत है जग में कपि
संकटमोचन नाम तिहारो

अर्थातः एक समय जब अहिरावण एंव मही रावण दोनों भाई भगवान राम को लेकर पाताल चले जाते हैं। तब हनुमान अपने मंत्र और साहस से पाताल जाकर अहिरावण और उसकी सेना का वध कर भगवान राम को वापिस लेकर आते हैं।

काज किये बड़ देवन के तुम
बीर महाप्रभु देखि बिचारो
कौन सो संकट मोर गरीब को
जो तुमसो नहिं जात है टारो
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु
जो कछु संकट होए हमारो
को नहीं जानत है जग में कपि

अर्थातः भगवान के सभी कार्य किए तुमने और संकट का निवारण किया मुझ गरीब के संकट का भी नाश करो प्रभु। तुम्हे सब पता है और तुम्ही इनका निवारण कर सकते हो। मेरे जो भी संकट हैं प्रभु उनका निवारण करों।

लाल देह लाली लसे, अरू धरि लाल लंगूर। बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर।
अर्थातः लाल रंग का सिंदूर लगाते हैं, देह जिनकी लाल है और लंबी सी पूंछ है वज्र के समान बलवान शरीर है जो राक्षसों का संहार करते हैं ऐसे श्री कपि को बार-बार प्रणाम

इति श्री संकटमोचन हनुमानाष्टक सम्पूर्ण

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