Google के बारे में जानकारी, कैसे दिन रात मेहनत कर बनी दुनिया की बडी कंपनी

Google के बारे में जानकारी, कैसे दिन रात मेहनत कर बनी दुनिया की बडी कंपनी

वैसे तो आप गूगल के बारे में काफी कुछ जानते हैं। ऐसा कोई विरला ही होगा जो गूगल के बारे में ना जानता हो। इंटरनेट का मतलब ही गूगल हो चुका है। लेकिन जरा सोचिए…ऐसा कैसे हुआ, किसने किया और क्यों हुआ इसके पीछे करीब 4 साल की मेहनत लगी है। इतना दिमाग लगाया गया है कि आम व्यक्ति की पंहुच से कई गुणा ज्यादा है। दुनिया की सबसे बडी कंपनी गूगल ने जहां हमारी जिंदगी आसान कर दी है वहीं हमें एक स्थान से बैठे लाखों किलोमीटर दूर की स्थिति पता चल जाती है। गूगल एक सफल कंपनियों में से एक है और दुनिया की सबसे बडी कंपनी है। लेरी पेज और सर्गी ब्रिन ने मिलकर इस कंपनी को आयाम तक पंहुचाया। आज हम आपको गूगल कंपनी के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां देंगे जो आपको मोटिवेट करेगी। आईए जानते हैं गूगल कंपनी के बारें।

गूगल के बारे में जानकारी

लेरी पेज
लेरी पेज का जन्म अमेरिका के मिशिगन में 26 मार्च 1973 को हुआ था। माता पिता यूनिवर्सिटी में बतौर प्रोफेसर थे। उनके घर पर कम्प्यूटर साईंस से संबधित गेजेटस और मेग्जीन पडी रहती थी। लेरी पेज बचपन से ही इंटेलीजेंट थे और घर पर रखे सामान को खोलकर समझना शुरू किया। लेरी पेज यह समझना चाहते थे कि कोई भी चीज काम कैसे करती है। उन्होंने 12 साल की उम्र में ही बिजनेसमेन बनने की सोच ली थी। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि मैं चीजों का आविष्कार करना चाहता था। लेरी पेज ने 1989 में ग्रेजूएट करने के बाद विश्व की सबसे बडी यूनिवर्सिटी स्टैनफोर्ड में पोस्ट ग्रेजूएशन पूरी की और वहीं पीएचडी करने लगे। इसी दौरान उनकी मुलाकात सर्गी ब्रिन से हुई।

सर्गी ब्रिन
कम्प्यूटर के मास्टर माईंड सर्गी ब्रिन का जन्म 1973 को रूस की राजधानी मास्को में हुआ था। मात्र 6 साल की उम्र में उन्होंने रूस को छोड दिया था। उन्होंने 1989 को मैथ में पीएचडी करने के लिए स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। सर्गी ब्रिन के पिता और दादा मैथ के टीचर थे। उन्होंने उनकी विरासत को आगे बढाते हुए मैथ को अपनाया और पीएचडी करने के लिए स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी की। इस दौरान उनकी मुलाकात लेरी पेज से हुई। दोनों के विचारों ने तालमेल बनाया और घंटो साथ बिताने लगे।

गूगल के बारे में जानकारी

World Wide Web
चूंकि दोनों कुछ नया और बडा करना चाहते थे तो उन्होंने वर्ड वाईब वेब बनाया। इसका मतलब यह था कि सभी बेवसाईट को एक साथ लिंक करके उनकी पाॅपलेरटी के हिसाब से रेंक किया जा सके। इस प्रोजेक्ट पर उन्होंने 4 साल तक कडी मेहनत की।

GoogoL रजिस्टर्ड की सोची मगर असफल रहे
सितम्बर 1996 में इन्होंने GoogoL नाम चुना और उसे रजिस्टर्ड करवाने की सोची मगर यह नाम पहले से ही रजिस्टर्ड था तो इस नाम को रजिस्टर्ड करवाने में वे असफल हो गए। 1 अंक के आगे 100 जीरों लगा दी जाए तो बनने वाला शब्द GoogoL बनेगा। इसलिए इन्होंने इस डोमेन को चुना था लेकिन यह नहीं हुआ।

अस्तित्व में आया Google
जब GoogoL को टाईप किया जा रहा था तो गलती से Google लिख दिया गया। तभी से इसे गूगल के नाम से जाना गया और इसी नाम से रजिस्टर्ड हो गया।

करीब 10 लाख डाॅलर का लिया कर्ज
अपनी कंपनी को खडी करने के लिए और दिन रात मेहनत करने के नतीजों को देखकर दोनों ने 10 साल डाॅलर का कर्ज लिया था। जब वे दिन रात कार्य कर रहे थे तो उन्हें पैसों की जरूरत पड गई। कंपनी को खडी करने के लिए इतने रूपए काफी थे। इतने का उन्होंने कर्ज लिया।

गूगल के बारे में जानकारी

1998 में गूगल इंक कंपनी की स्थापना की
1998 के दशक में दोनों ने गूगल इंक कंपनी की स्थापना की। गूगल बहुत जल्द ही लोगों में ब्रांड बनता गया। देखते ही देखते 2 साल के अंदर गूगल की मार्किट वेल्यू आसमान छूने लग गई थी। फिर दोनों ने पीछे मुडकर नहीं देखा और कंपनी को ओर मजबूत करने में जुट गए।

2004 गूगल का आईपीओ शेयर मार्किट में उतारा
वर्ष 2004 में गूगल ने अपना आईपीओ (Initial Public Offering) उतारा। अपना आईपीओ उतारने के बाद गूगल ओर ज्यादा मजबूत हो गया। लेरी पेज और सर्गी ब्रिन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वे दोनों देखते ही देखते अरबती बन गए।

सुदंर पिचाई ने ज्वाईन की गूगल
भारत के चेन्नई में 10 जून को जन्में सुंदर पिचाई ने गूगल कंपनी को ज्वाईन किया। उस समय भी गूगल कंपनी को ज्वाईन करना कोई आसान काम नहीं था। चूंकि सुदंर इससे पहले कई कंपनियों में कार्य कर चुके थे। सुदंर पिचाई ने गूगल में कार्य करना शुरू किया और आईडिया दिया कि गूगल का खुद का वेब ब्राउजर होना चाहिए।

2004 में बनाया गूगल क्राॅम
आज सबसे ज्यादा जिस ब्राउजर का इस्तेमाल होता है उसका नाम गूगल क्राॅम है। इसको बनाने में भारतीय मूल के निवासी सुदंर पिचाई का काफी अहम रोल है।

गूगल के बारे में जानकारी

2004 को इमेल की स्थापना की
आज जिस इमेल आईडी को एक मिनट तक बना लेते हैं। उसे गूगल ने 2004 में बनाया था। पहले इसे बनाने में कठिनाईयों का सामना करना पडता था लेकिन जिस तरह से यह पाॅपलुर होती गई, कंपनी ने इसे फ्री कर दिया। आज अरबों ईमेल आईडी गूगल पर बनाई गई हैं।

2005 में यू-टयूब को खरीद लिया
आज के समय में जो यू टयूब दर्शकों के दिलों पर राज कर रही है उसे 2005 में गूगल ने खरीद लिया था। यूटयूब पर दोनों ने काम किया और उस अंजाम तक पंहुचाया जिससे आज लोगों के दिलों पर राज कर रही है।

2009 एन्ड्राॅड आपरेटिंग सिस्टम किया लांच
30 अप्रैल 2009 को गूगल ने एन्ड्राॅयड आपरेटिंग सिस्टम लांच किया। यह वही एन्ड्राॅयड है जिसें आप फोन में चलाते हैं। जब आप फोन बंद करके चलाते हैं तो जो एन्ड्राॅयड लिखा आता है वही गूगल कंपनी ने बनाया है। आज एन्ड्राॅयड पूरी दुनिया में टाॅप पर है।

गूगल के बारे में जानकारी

50 से ज्यादा प्रोडक्ट बनाए
गुगल ने जहां 50 से ज्यादा प्रोडक्ट बनाए हैं वहीं सैंकडो एप्स बनाई हैं जिनमें करीब 100 पाॅपूलर हैं। आप Google Products List और Google Apps List पर क्लिक करके जान सकते हैं।

कंपनी के हर कर्मचारी को करोडो में वेतन
गूगल कंपनी में नौकरी करना इतना आसान नहीं है। हर साल 20000 लोग गूगल में जाॅब के लिए अप्लाई करते हैं। कोई ही सिलेक्ट हो पाता है। इनके इंटरव्यू में इतने कठिन सवाल पूछे जाते हैं आदमी का दिमाग रूक जाए। अगर कोई कंपनी में सिलेक्ट हो जाता है तो उसका भविष्य कंपनी के हाथों में आ जाता है। जब तक व्यक्ति कंपनी में काम करता है तो उसे हर सुख सुविधा प्रदान की जाती है। अगर मर जाता है कि 10 साल तक उसकी पत्नी को आधा वेतन और बच्चे को प्रतिमाह 72 हजार रूपए अलग से दिए जाते हैं।

आपकी डिटेल निकाल सकता है गूगल
आप यदि सोचते होंगे कि मुझे कोई नहीं जानता कि मैं कैसा हूं तो इस भूल को निकाल दिजिए। आपके द्वारा गूगल में अगर कोई शब्द भी लिखा गया है तो गूगल बता देगा कि 10 साल पहले आपने यहां खडे होकर इस शब्द को इस मोबाईल या कम्प्यूटर पर दर्ज किया था। जब कोई भयंकर लूटपाट हो जाती है तो पुलिस गूगल की मदद लेती है।

गूगल के बारे में जानकारी

प्रतिवर्ष 20 लाख लोग आवेदन करते हैं
गूगल कंपनी में प्रतिवर्ष 20 लाख लोग अप्लाई करते हैं। मगर कुछ ही सिलेक्ट हो पाते हैं। ऐसा नहीं है कि कंपनी पढे लिखे लोगों को नौकरी देती है, यह भी दावा किया जाता है कि कंपनी ने उन लोगों को भी नौकरी दी है जिन्हे सिर्फ प्रोग्रामिंग करती आती हो।

याहू ने नहीं खरीदा गूगल
समय समय की बात होती है। एक समय था तब गूगल को बेचा जा रहा था। उस वक्त याहू जोकि सबसे बडा सर्च इंजन था, उसने गूगल को खरीदने से मना कर दिया। आज आप ही अंदाजा लगा सकते हैं कि याहू की कितनी बडी गलती थी।

40 देशों में 70 से ज्यादा आफिस हैं
विश्व की सबसे बडी कंपनी गूगल के विश्व के 40 देशों में 70 से भी ज्यादा आॅफिस हैं। हर कर्मचारी हर तरह की जिम्मेदारियां दी गई हैं। कंपनी का हर कर्मचारी पूरी लगन के साथ कार्य करता है।

2010 के बाद कंपनी खरीदती गई गूगल
जब देश की सबसे बडी कंपनी होने का खिताब सिर पर था तो कंपनी का वो दौर भी आया जब उसने हर कंपनी को खरीदना शुरू कर दिया। वो दौर 2010 के बाद आया। गूगल हर कंपनी को खरीदती गई और उसे परवान चढाती गई। अब तक करीब 127 कंपनी गूगल द्वारा खरीदी जा चुकी हैं।

पलक झपकते ही कमा लेती है 50 हजार
जब आप अपनी पलक झपकाते हैं तो गूगल 50 हजार रूपए कमा लेती है। गूगल की साला आय 50 अरब डाॅलर है। यह इतनी बडी रकम है कि गिनने के लिए मशीने खराब हो जाएगीं।

वैसे तो गूगल कंपनी के बारे में जितना लिखा जाए उतना ही कम होगा। यह इतनी बडी कंपनी है कि अगर इसके बारे में लिखने बैठ जाएं तो पूरा दिन लग जाएगा। हमने गूगल की कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। हमारा मकसद है कि आप भी कुछ अच्छा करें।

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